रचना क्र. 378
मुझे है काम ईश्वरसे
श्री ब्रह्मानंद (पुष्कर) · null
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मुझे है काम ईश्वरसे जगत रूठे तो रूठन दे ॥धृ॥
कुटुंबपरिवार सुतदारा
मालधन लाजलोकन की ।
हरिके भजन करने में
अगर छूटे तो छूटन दे ॥१॥
बैठ संगत में संतन की
करूं कल्याण मैं अपना ।
लोग दुनियां के भोगों में
मौज लूटें तो लूटन दे ॥२॥
प्रभु के ध्यान करने की
लगी दिल में लगन मेरे ।
प्रीत संसार विषयों सें
अगर टूटे तो टूटन दे ॥३॥
धरी सिर पाप की मटकी
मेरे गुरुदेव ने झटकी ।
वो ब्रह्मानंद ने पटकी
अगर फूटे तो फूटन दे ॥४॥
