रचना क्र. 376
राम दशरथ के घर जन्मे
श्री ब्रह्मानंद (पुष्कर) · null
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राम दशरथ के घर जन्मे, घराना हो तो ऐसा हो ।
लोक दर्शन को चले आये, सुहाना हो तो ऐसा हो ॥धृ॥
यज्ञ के काम करने को,
मुनीश्वर ले गया बन में ।
उडाये शीश दैत्यन के,
निशाना हो तो ऐसा हो ॥१॥
धनुष को जायकर तोडा,
जनक की राजधानी में ।
भूप सब मन में शरमाये,
लजाना हो तो ऐसा हो ॥२॥
पिता की मान के आज्ञा,
राम बन को चले जबही ।
न छोडा संग सीता ने,
जनाना हो तो ऐसा हो ॥३॥
सिया को ले गया रावण,
बनाकर वेष जोगी का ।
कराया नाश सब अपना,
दिवाना हो तो ऐसा हो ॥४॥
प्रीत सुग्रीव से कर के,
गिराया बाण से बाली ।
दिलाई नार फिर उसकी,
याराना हो तो ऐसा हो ॥५॥
गया हनुमान सीता की,
खबर लेनेऽको लंका में ।
जलाकर के नगर आया,
सियाना हो तो ऐसा हो ॥६॥
बांध सेतू समुंदर में,
उतारा पार सेना को ।
मिटाया वंश रावण का,
हराना हो तो ऐसा हो ॥७॥
राज्य देकर बिभीषण को,
अयोध्या लौटकर आये ।
वो ‘ब्रह्मानंद’ बल अपना,
दिखाना हो तो ऐसा हो ॥८॥
