रचना क्र. 287
जिसको नही है बोध
श्री ब्रह्मानंद (पुष्कर) · null
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जिसको नही है बोध तो गुरुज्ञान क्या करे
निजरूप को जाना नहीं पुराण क्या करे ॥ धृ ॥
घटघट मे ब्रह्मज्योत का परकाश हो रहा ।
मिटा न द्वैतभाव तो फिर ध्यान क्या करे ॥१॥
रचना प्रभु की देख के ज्ञानी बडे बडे ।
पावे न कोई पार तो भवग्यान क्या करे ॥२॥
कर के दया दयाल ने मानुष जनम दिया ।
बंदा न करे भजन तो भगवान क्या करे ॥३॥
सब जीव जंतुओ में जिसे है नहीं दया ।
ब्रह्मानंद ब्रत नेम पुण्य दान क्या करे ॥४॥
