रचना क्र. 427
जय गुरु देव दयानिधि
श्री ब्रह्मानंद (पुष्कर) · null
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जय गुरु देव दयानिधि दीनन हितकारी ।
जय जय मोहविनाशक भवबंधनहारी ॥१॥ जय देव गुरु देव
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव गुरु मूरतिधारी ।
वेद पुराण बखानत गुरु महिमा भारी ॥२॥ जय देव गुरु देव
जप तप तीरथ संयम दान विविध दीने ।
गुरु बिन ज्ञान न होवे कोटि जतन कीने ॥३॥ जय देव गुरु देव
माया मोह नदी चल जीव बहें सारे ।
नाम जहाज बिठा कर गुरु पलमें तारे ॥४॥ जय देव गुरु देव
काम क्रोध मद मत्सर चोर बडे भारे ।
ज्ञान खडग दे करमें गुरु सब संहारे ॥५॥ जय देव गुुरु देव
नाना पंथ जगतमें निज निज गुण गावे ।
सबका सार बता कर गुरु मारग लावे ॥६॥ जय देव गुरु देव
गुरुचरणामृत निर्मल सब पातक हारी ।
वचन सुनत तम नाशे सब संशय टारी ॥७॥ जय देव गुरु देव
तन मन धन सब अर्पण गुरुचरणन कीजे ।
ब्रह्मानंद परम पद मोक्ष गती लीजे ॥८॥ जय देव गुरु देव
