रचना क्र. 129
मोहे लागी लगन गुरुचरणन की
श्री मीराबाई · null
null
मोहे लागी लगन गुरुचरणन की ॥धृ॥
चरण बिना मुझे कछु नहीं भावे ।
झूठ माया सब सपनन की ॥१॥
भवसागर सब सूख गयो है ।
फिकर नहीं मुझे तरनन की ॥२॥
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर ।
आस श्री गुरुचरणन की ॥३॥
