रचना क्र. 124
तुम बिन मेरी कौन खबर ले
श्री मीराबाई · null
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तुम बिन मेरी कौन खबर ले ।
गोवर्धन गिरिधारी ॥धृ॥
मोर मुकुट पीतांबर शोभे ।
कुंडल की छबी न्यारी ॥१॥
भरी सभा में द्रौपदी ठारी ।
राखो लाज हमारी ॥२॥
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर ।
चरण कमल बलिहारि ॥३॥
