रचना क्र. 103
नाम नाम नाम जपो नाम राम का
श्री ब्रह्मानंद (पुष्कर) · null
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नाम नाम नाम जपो नाम राम का
काम काम काम तजो काम धाम का ॥धृ॥
बिना हरि के नाम कबी न सुख पाएगा ।
मस्कर के अंतकाल में तू नरक जाएगा ।
मिलेगा बार बार तुझे तन गुलाम का ॥१॥
करता है क्या गुमान तू जोबन वा माल का ।
मेहमान है यह पास तेरे आजकाल का ।
पुतला बिखर जाएगा तेरा हाडचामका ॥२॥
तप योग यज्ञ दान कर्म है बडे सही ।
कलियुग में नाम के समान दूसरा नहीं ।
मिलता है यत्न से बिना, बिनाही दामका ॥३॥
पाकर मनुज का तन जो हरिनाम ना लिया ।
चिंतामणी को मूढ काच से बदल दिया ।
‘ब्रह्मानंद’ भजन के बिना जीना न काम का ॥४॥
