रचना क्र. 480
श्री ब्रह्मानंद (पुष्कर) यांची आरती
श्री पेठेकाका · null
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जय गुरु ब्रह्मानंद स्वामी |
दिव्य भजनप्रेमी |
पुष्करतीर्थनिवासी स्वामी |
दिव्य भजनप्रेमी |
जयजय दिव्यभजनप्रेमी ||धृ||
ज्योतिर्मठसे दीक्षा पायी |
ब्रह्मस्थिति आजीवन आयी |
प्रतापनृप को मुक्ति दिलायी |
शिष्यहृदयस्थित अंतर्यामी ||१||
दिव्यभजनप्रेमी, जयजय दिव्यभजनप्रेमी...
योगरसायन, ईश्वरदर्शन |
नित्य आचरण का निर्देशन |
प्रश्नोत्तरि में अमूल्य भाषण |
भजन नाम में तुमहि नामी ||२||
दिव्यभजनप्रेमी, जयजय दिव्यभजनप्रेमी...
मायाभ्रम का भेद बताया |
ज्ञान, गुरु का भान दिलाया |
हरिसुमिरन में भाव जगाया |
दीन शरण, चरणों के प्रेमी ||३||
दिव्यभजनप्रेमी, जयजय दिव्यभजनप्रेमी...
